1. यादव (अर्थ- महाराज यदु के वंशज 2. प्राचीन भारत के वह लोग जो पौराणिक नरेश यदु के वंशज हैं । 3. यादव वंश प्रमुख रूप से आभीर (वर्तमान अहीर)
4. अंधक, व्रष्णि तथा सत्वत नामक समुदायों से मिलकर बना था, जो कि भगवान कृष्ण के उपासक थे। 5. यह लोग प्राचीन भारतीय साहित्य मे यदुवंश के प्रमुख अंगों के रूप मे वर्णित है 6.यादव महाराज यदु के वंशज है और यादव नाम से जाने जाते है।
यादव
7 .जयंत गडकरी के कथनानुसार, " पुराणों के विश्लेषण से यह निश्चित रूप से मान्य है कि अंधक,वृष्णि, सत्वत तथा अभीर (अहीर) जातियों को संयुक्त रूप से यादव कहा जाता था जो कि श्रीक़ृष्ण की उपासक थी। परंतु यह भी सत्य है कि पुराणों में मिथक तथा दंतकथाओं के समावेश को नकारा नहीं जा सकता, किन्तु महत्त्वपूर्ण यह है कि पौराणिक संरचना के तहत एक सुद्र्ण सामाजिक मूल्यो की प्रणाली प्रतिपादित की गयी थी।
8.लुकिया मिचेलुत्ती के यादवों पर किए गए शोधानुसार -
“यादव जाति के मूल में निहित वंशवाद के विशिष्ट सिद्धांतानुसार, सभी भारतीय गोपालक जातियाँ, उसी यदुवंश से अवतरित हैं जिसमें श्रीक़ृष्ण (गोपालक और क्षत्रिय) का जन्म हुआ था .....उन लोगों में यह दृढ़ विश्वास है कि वे सभी श्रीक़ृष्ण से संबन्धित हैं तथा वर्तमान की यादव जातियाँ उसी प्राचीन वृहद यादव सम समूह से विखंडित होकर बनी हैं।
वर्तमान परिपेक्ष्य
क्रिस्टोफ़ जफ़्फ़ेर्लोट के अनुसार
“यादव शब्द कई उपजातियों को आच्छादित करता है जो मूल रूप से अनेक नामों से जानी जाती है, हिन्दी क्षेत्र, पंजाब व गुजरात में- अहीर, महाराष्ट्र, गोवा में - गवली, आंध्र व कर्नाटक में- गोल्ला, तमिलनाडु में - कोनर, केरल में - मनियार जिनका सामान्य पारंपरिक कार्य चरवाहे, गोपालक व दुग्ध-विक्रेता का था।
लुकिया मिचेलुत्ती के विचार से -
“यादव लगातार अपने जातिस्वरूप आचरण व कौशल को उनके वंश से जोड़कर देखते आये हैं जिससे उनके वंश की विशिष्टता स्वतः ही व्यक्त होती है। उनके लिए जाति मात्र पदवी नहीं है बल्कि रक्त की गुणवत्ता है, और ये द्रष्टव्य नया नहीं है। अहीर (वर्तमान में यादव) जाति की वंशावली एक सैद्धांतिक क्रम के आदर्शों पर आधारित है तथा उनके पूर्वज, गोपालक योद्धा श्रीकृष्ण पर केंद्रित है, जो कि एक क्षत्रिय थे।
यादव उपजातियाँअहीर, कृष्णोत, मधुरोत, ग्वाला, गवली, सदगोप, मनियार, गोल्ला, कोनार(आयर), जाधव, जादम, गोपाल, गोवारी, यादव, गोप, गोपी, घोष, राव, राय, चोधरी, दास, चन्द्र, आर्य
अहीर ऐतिहासिक पृष्ठभूमि से एक लड़ाकू जाति है।1920 मे ब्रिटिश शासन ने अहीरों को एक कृषक जाति के रूप मे वर्गीकृत किया था जो कि उस काल में "लड़ाकू जाति" का पर्याय थी। ,जबकि वे उससे पहले से भी सेना में भर्ती होते आ रहे थे। तब ब्रिटिश सरकार ने अहीरों की चार कंपनियाँ बनायीं थी, इनमें से दो 95वीं रसेल इंफेंटरी में थी।1962 के भारत चीन युद्ध के दौरान 13 कुमाऊं रेजिमेंट की अहीर कंपनी द्वारा रेजंगला का मोर्चा पर यादव सैनिकों का पराक्रम व बलिदान भारत में आज तक सराहनीय माना जाता है। और उनकी बहादुरी की याद में युद्ध बिंदु स्मारक को "अहिर धाम" नाम दिया गया
वे भारतीय सेना की राजपूत रेजीमेंट, कुमाऊं रेजिमेंट, जाट रेजिमेंट, राजपूताना राइफल्स, बिहार रेजिमेंट, ग्रेनेडियर्स में भी भागीदार हैं।भारतीय हथियार बंद सेना में आज तक बख्तरबंद कोरों व तोपखानों में अहीरों की एकल टुकड़ियाँ विद्यमान हैं। जिनमें उन्हें वीरता और बहादुरी के विभिन्न पुरस्कार प्राप्त हुए हैं।
सैन्य पुरस्कार विजेता यादव सैनिक.....
(सूची यादव उपनाम पर आधारित है)
ग्रेनेडियर योगेंद्र सिंह यादव, परम वीर चक्र
कमांडर बी. बी. यादव, महावीर चक्र
लांस नायक चंद्रकेत प्रसाद यादव, वीर चक्र
मेजर जय भगवान सिंह यादव, वीर चक्र
विंग कमांडर कृष्ण कुमार यादव, वीर चक्र
नायक गणेश प्रसाद यादव, वीर चक्र
नायक कौशल यादव, वीर चक्र
जगदीश प्रसाद यादव, अशोक चक्र(मरणोपरांत)
सुरेश चंद यादव, अशोक चक्र(मरणोपरांत)
स्क्वाड्रन लीडर दीपक यादव, कीर्ति चक्र(मरणोपरांत)
सूबेदार महावीर सिंह यादव, अशोक चक्र(मरणोपरांत)[
पायनियर महाबीर यादव, शौर्य चक्र(मरणोपरांत)
पैराट्रूपर, सूबे सिंह यादव, शौर्य चक्र
नायब सूबेदार राम कुमार यादव, शौर्य चक्र(मरणोपरांत)
सेप्पर आनंदी यादव, इंजीनियर्स,शौर्य चक्र(मरणोपरांत)
नायक गिरधारीलाल यादव, शौर्य चक्र(मरणोपरांत)
हरि मोहन सिंह यादव, शौर्य चक्र
कैप्टन वीरेंद्र कुमार यादव, शौर्य चक्र
पेटी ऑफिसर महिपाल यादव शौर्य चक्र
कैप्टन बब्रू भान यादव, शौर्य चक्र
मेजर प्रमोद कुमार यादव,शौर्य चक्र
रमेश चन्द्र यादव, शौर्य चक्र
मेजर धर्मेश यादव, शौर्य चक्र
लेफ्टिनेंट मानव यादव,शौर्य चक्र
मेजर उदय कुमार यादव, शौर्य चक्र
कैप्टन कृष्ण यादव, शौर्य चक्र
कैप्टन सुनील यादव,शौर्य चक्र
यादव आर्बेशंकर रजधारी, शौर्य चक्र
अन्सार खान पत्रकार
7905251726..........